Iran-US War: खाड़ी युद्ध लंबा चला तो किन 10 चीजों पर होगा सबसे अधिक असर, निवेशक किन बातों पर रखें नजर? – मार्केट

Middle East Crisis

Middle East Crisis: खाड़ी देशों की दुनिया भारत को ऐसे और इतने तरीकों से छूती है जो आमतौर पर दिखाई नहीं देते लेकिन संकट के समय बहुत बुरी तरह दिखाई देते हैं…

हाइलाइट्स

  • मध्य पूर्व में बढ़ता युद्ध सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर कई स्तरों पर पड़ सकता है।
  • निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव भारत की अर्थव्यस्था और बाजार को किन-किन रास्तों से प्रभावित कर सकता है।
  • मिडिल ईस्ट का भारत पर असर बहुत गहरा और कई लेयर वाला है। ये ऐसे चैनलों से होकर गुजरता है, जिन्हें अधिकतर निवेशक पूरी तरह से समझ नहीं पाते हैं।

Middle East Crisis, Iran-US War: मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव भारत के लिए सिर्फ एक जियो-पॉलिटिकल घटना नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है और इसका लगभग आधा हिस्सा 33 किलोमीटर चौड़े समुद्री मार्ग Strait of Hormuz यानी होरमुज जलसंधि से होकर आता है। इसके अलावा खाड़ी देशों में करीब 80 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं, जो हर साल भारत को 50 अरब डॉलर से अधिक की रेमिटेंस भेजते हैं। ऐसे में अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर कई अलग-अलग चैनलों के जरिए दिखाई दे सकता है।

जब-जब मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी में तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों को रोकने की कोशिश की जाती है। सरकार की यह सोच एकदम सही है, लेकिन यह कहानी का सिर्फ एक छोटा-सा हिस्सा है। मिडिल ईस्ट का भारत पर असर बहुत गहरा और कई लेयर वाला है। ये ऐसे चैनलों से होकर गुजरता है, जिन्हें अधिकतर निवेशक पूरी तरह से समझ नहीं पाते हैं।

आपके किचन में रखे कुकिंग गैस सिलेंडर से लेकर दुबई से किसी रिश्तेदार द्वारा भेजे जाने वाली मोटी रकम तक, और पंजाब में किसान के खेत की यूरिया से लेकर सूरत में तराशे जा रहे हीरों तक – खाड़ी देशों की दुनिया भारत को ऐसे और इतने तरीकों से छूती है जो आमतौर पर दिखाई नहीं देते लेकिन संकट के समय बहुत बुरी तरह दिखाई देते हैं।

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